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Wednesday, March 11, 2015

स्‍तनों का घरेलू उपचार, अविकसित स्‍तन, स्‍तनों में सूजन, अतिस्‍थूल स्‍तन, थनैला तथा स्‍तन कैंसर आदि।


स्‍तनों का घरेलू उपचार


स्‍तनों को किसी भी स्‍त्री की सुंदरता का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। यदि स्‍तन स्‍वस्‍थ और पूरी तरह विकसित हैं, तो यह मान लिया जाता है कि स्‍त्री सुंदर है। किसी भी स्‍त्री के चेहरे के बाद उसके स्‍तन ही सौंदर्य का गुणगान करते हैं। स्‍तन स्‍त्री को सौंदर्य की मूरत तो बनाते हैं पर यदि स्‍तनों में कोई रोग है, तो यह बड़ी परेशानी का सबब भी बनते हैं। स्‍तनों के विकार स्‍त्री के
आत्‍मविश्‍वास को पूरी तरह चकनाचूर करके रख देते हैं। स्‍तनों की छोटी मोटी बीमारियों से लेकर स्‍तन कैंसर जैसी भयानक और जानलेवा बीमारियां हैं। जैसे अविकसित स्‍तन, स्‍तनों में सूजन, अतिस्‍थूल स्‍तन, थनैला तथा स्‍तन कैंसर आदि। यदि कोई महिला इन समस्‍याओं से ग्रस्‍त है तो वह नीचे बताए गए उपायों को अजमा कर खुद ही उपचार कर सकती है। पर इन उपचारों के संदर्भ में किसी रजिस्‍टर्ड वैध अथवा डॉक्‍टर से सलाह जरूर ले लें।


स्‍तन कैंसर का घरेलू उपचार


१ * एक ग्‍लास पानी में हर्बल ग्रीन टी को आधा होने तक उबालें और फिर उसे पीएं। यह फाएदेमंद होती है।

२ * रोज अंगूर या अनार का जूस पीने से स्‍तन कैंसर से बचा जा सकता है।

३ * सोंठ, नमक, मूली, सरसों, शमी और सहिजन के बीज को बराबर मात्रा में लेकर खटटे छाछ में पीसकर स्‍तनों पर लेप करें। एक घंटे बाद नमक की पोटली से दस – पन्‍द्रह मिनट तक सिंकाई करें। आराम मिलेगा।

४ * रोज लहसुन का सेवन करने से स्‍तन कैंसर की संभावना को रोका जा सकता है।

५ * पोई के पत्‍तों को पीसकर पिण्‍ड बनाकर लेप करने तथा पत्‍तों द्धारा अच्‍छी तरह ढंककर पटटी बांधने से शुरूआती अवस्‍था का कैंसर ठीक हो जाता है।


स्‍तनों की सूजन


१ * गेंदे की पत्तियों को कपड़े में लपेट कर बांध लें। फिर इसके ऊपर गीली मिटटी का लेप लगा दें। फिर कपड़े की इस पोटली को उस आग की भटटी में रखें जो ठंडी होने वाली हो। फिर जब पोटली के ऊपर की मिटटी लाल हो जाए, तब उसे बाहर निकालें और पत्तियों को अलग कर लें। इसके बाद इन्‍हीं पत्तियों को स्‍तनों पर बांधें।

२ * धतूरे की पत्‍ते और हल्‍दी को पीसकर स्‍तनों पर लेप करने से स्‍तनों की सूजन में आराम मिलता है।

३ * अजवायन का तेल को गुनगुना करके २ – ३ बार स्‍तनों की मालिश करें और फिर अरंड का पत्‍ता बांध दें। सूजन में आराम मिलेगा।

४ * स्‍तनों में यदि सूजन के साथ साथ दर्द भी हो तो इंद्रायण की जड़ को पीसकर लेप बना लें और फिर इसे गर्म करके स्‍तनों पर लेप करने से दर्द कम होता है और सूजन भी कम हो जाती है।

५ * धृतकुमारी यानि ऐलोवेरा के गूदे में हल्‍दी मिलाकर थोड़ा सा गर्म करके लेप करने से सूजन कम हो जाती है।


अविकसित स्‍तन तथा छोटे स्‍तनों को बड़े करने के उपाय


१ * यदि स्‍तन अविकसित तथा छोटे हैं तो बादाम के तेल की नियमित मालिश करने से स्‍तन विकसित व पुष्‍ट हो जाते हैं।

२ * अश्‍वगंधा और शताबरी को बराबर मात्रा में लेकर चूर्णं बनाएं और फिर एक – एक चम्‍मच चूर्णं सुबह शाम दूध के साथ ४५ से ६० दिनों तक खाएं। आपकी चिंता का समाधान होगा।

३ * महानारायण तेल की मसाज से भी अविकसित स्‍तन आकर्षक हो जाते हैं।

४ * पीपरी का चूर्णं २० ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण २० ग्राम, अश्‍वगंधा का चूर्णं १५० ग्राम, सोंठ का चूर्णं ७५ ग्राम, लेकर शुद्ध घी में भून लें और फिर आधा किलो पुराने गुड़ की चाशनी बनाकर भूने गए चूर्णं को चाशनी में मिलाकर रख लें। इसे रोज २० – २५ ग्राम मात्रा में रोज गुनगुने दूध के साथ खाने से स्‍तन आकर्षक और पुष्‍ट होते हैं।

५ * खाने में फल, दालें, ताज़ा सब्जियां, काजू, दूध, दही, घी, अंडे, कच्‍चा नारियल व नींबू आदि का सेवन जरूर करें। यह स्‍तनों का अच्‍छी तरह पोषण करते हैं।


अतिस्‍थूल स्‍तन (बड़े तथा लटके हुए स्‍तन)


१ * यदि स्‍तन स्‍थूल हैं तो सबसे पहले आप वसा युक्‍त भोजन खाना बंद कर दें। जैसे कि दूध, घी, मलाई, मक्‍खन तथा मिठाईं आदि। यदि मांसाहारी हैं तो मांस से परहेज करें।

२ * काली गाय के दूध में सफेद मोथा पीसकर लेप करने से स्‍तनों के ढीलेपन में कमी आती है और स्‍तन कठोर होते हैं।

३ * महानारायण तेल स्‍तनों पर लगाकर उंगलियों से दबाकर नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें। मालिश के बाद गुनगुने पानी की धार स्‍तनों पर डालें १० मिनट गुनगुने पानी की धार डालने से स्‍तनों की चर्बी घटेगी और सौंदर्य वापस लौट आएगा।


स्‍तनों का थनैला रोग


१ * नींबू के रस में शहद मिलाकर स्‍त्‍नों पर लेप करने से थनैला में बहुत लाभ होता है।

२ * मोगरे के फूलों को पीस कर स्‍तनों पर लेप करके बांध दें। सुबह शाम इस प्रक्रिया को करने से थनैला रोग दो – तीन दिन में ही ठीक हो जाता है।

३ * अरहर की दाल (तुअर दाल) आम की गुठली और जौ को पानी में एक साथ पीसकर दिन में तीन – चार बार लेप करने से बहुत आराम मिलता है।

४ * गेंहू, जौ और मूंग का बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ गर्म करके तकलीफ वाले स्‍थान पर लगाने से आराम मिलता है।

५ * सहिजन की छाल को महीन पीसकर उसका गर्म लेप करने से थनैला बिना पके ही बैठने लगता है।

६ * दस ग्राम काली मिर्च और ५ ग्राम दालचीनी पीसकर इसकी एक खुराक बनाएं। दिन में तीन बार तीन खुराकें २० ग्राम शहद में मिलाकर खाएं। थनैला का उपचार हो गया।

७ * १२५ ग्राम नीम के पत्‍तों को लेकर एक लीटर पानी में उबालें। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उतारकर कपड़े से छानकर थनैला को धोएं। आराम मिलेगा।

८ * हरा धनिए की पत्तियों को पीसकर हल्‍का गर्म करके लेप करें। बहुत आराम मिलेगा।

९ * हल्‍दी और धतूरे के पत्‍ते समान मात्रा में लेकर पीस लें। फिर गर्म करके थनैला पर लेप करें। आराम मिलेगा।



(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)   

Wednesday, March 4, 2015

पुरूषों की सेक्‍स संबंधी समस्‍याएं और उनका उपचार। मर्दानगी वापस कैसे पाएं।


पुरूषों की सेक्‍स संबंधी समस्‍याएं और उनका उपचार


पुरूषों की अनेक ऐसी अनेक व्‍यक्तिगत बीमारियां हैं। जो उन्‍हें बुरी तरह प्रभावित करती हैं। पुरूषों की सेक्‍स संबंधी समस्‍याएं स्‍वास्‍थ को खराब तो करती ही हैं, साथ ही उनके दांपत्‍य जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। अपनी तमाम सेक्‍स समस्‍याओं के चलते पुरूष अत्‍याधिक कमजोरी महसूस करने लगते हैं और मानसिक अवसाद की चपेट में आ जाते हैं। वह झोला छाप डॉक्‍टरों के चक्‍कर में
भी फंस जाते हैं और धन के साथ साथ अपना सब कुछ लुटा बैठते हैं। पुरूषों की यौन समस्‍याओं का इलाज आयुर्वेद तथा घरेलू चिकित्‍सा पद्धति में मौजूद है। नीचे दी गई कुछ बीमारियों और उनके उपचार को पढ़कर लाभ उठाया जा सकता है। आप इन पर अमल करने से पहले रजिस्‍टर्ड वैध अथवा डॉक्‍टर से परामर्श जरूर ले लें। वैसे यह पूरी तरह सुरक्षित घरेलू उपचार हैं।


यदि शीघ्रपतन हो रहा हो तो....


१ * इलायची दाना, बादाम, जावित्री, गाय का मक्‍खन और शक्‍कर सभी को बराबर मात्रा में मिलाकर रोज सुबह खाने से धातु पुष्‍ट होती है। इससे शीघ्रपतन दूर हो जाता है। कहने का मतलब यह धातु पतली होगी तो जल्‍दी बह जाती है और गाढ़ी व स्‍वस्‍थ होगी, तो अधिक देर तक ठहरेगी।

२ * १० ग्राम सेमल की छाल दूध में पीसकर उसमे मिश्री मिलाकर रोज सुबह खाने से धातु पुष्‍ट होती है तथा वीर्य में गाढ़ापन आता है और वीर्य में वृद्धि भी होती है।

३ * दो ग्राम दालचीनी पाउडर सुबह शाम दूध में मिलाकर पीने से वीर्य में गाढ़ापन आता है, इससे शीर्घ पतन दूर हो जाता है।


सेक्‍स (यौन) शक्ति बढ़ाने के उपाय


१ * रोज सुबह सवेरे नाश्‍ते में एक ग्‍लास टमाटर के रस में एक दो चम्‍मच शहद मिलाकर पीने से ताकत बढ़ती है।

२ * सेक्‍स शक्ति बढ़ाने के लिए रोजाना सौ ग्राम छुहारे दूध के साथ खाएं।

३ * दस-पन्‍द्रह मुनक्‍कों को पानी में धो कर दूध में उबालें। इससे वह फूल कर मीठे हो जाएंगे। आप इन्‍हें खाकर ऊपर से वही दूध पी लें। सेक्‍स शक्ति में इजाफा होगा।

४ * लहसुन को सेक्‍स शक्ति बढ़ाने और सेक्‍स संबंधी कमजोरी दूर करने के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है। लहसुन की दो-तीन कलियां कच्‍ची ही खाने से सेक्‍स क्षमता बढ़ती है।

५ * कूटे हुए छुहारे, पिस्‍ता, बादाम व बेल फल के बीज को समान मात्रा में मिलाकर खाने से पुरूषों की यौन क्षमता बढ़ती है।

६ * सर्दी का मौसम हो तो सुबह दो-तीन खजूर घी में भूनकर नियमित रूप से खाने से भी ताकत में इजाफा होता है।

७ * प्‍याज का रस सेक्‍स शक्ति बढ़ाने का कारगर उपाय है। विशेषकर सफेद प्‍याज (जोकि आमतौर पर बाजार में मिलती नहीं है। इसलिए जब भी आपको बाजार में सफेद प्‍याज दिखाई दे, तो तुरंत खरीद लें)। आप रोज प्‍याज का रस पी‍एं। रस पीना रोज संभव न हो तो कच्‍ची प्‍याज सलाद में अधिक अधिक मात्रा में खाएं। सेक्‍स शक्ति को बल मिलेगा।

८ * एक ग्राम जायफल का चूर्णं सुबह ताजे पानी के साथ लेने से सेक्‍स क्षमता में बढ़ोत्‍तरी होती है।

९ * यदि सेक्‍स करने की इच्‍छा में कमी आई है, तो आप १५० ग्राम गाजर को काटकर हाफ बॉयल्‍ड अंडा और एक चम्‍मच शहद मिलाकर दो ढाई माह तक दिन में एक बार खाएं। सेक्‍स के प्रति अरूचि दूर हो जाएगी।

१० * छह मिलीग्राम प्‍याज का रस, ढाई चम्‍मच शहद, ३ ग्राम घी एक साथ मिलाकर रोज शक्‍कर मिला दूध पिएं। यह नुस्‍खा दो तीन माह तक इस्‍तेमाल करने से वीर्य में वृद्धि होती है और वीर्य गाढ़ा हो जाता है। वीर्य यदि गाढ़ा हो गया तो ठहराव भी ज्‍यादा देर तक होगा और आप संतुष्‍ट हो पाएंगें।

११ * १५ ग्राम सफेद मूसली की जड़ को एक कप दूध में उबालकर दिन में दो बार पिएं। इसके रोजाना सेवन से शीघ्रपतन से छुटकारा मिलता है साथ ही नपुसंकता भी दूर हो जाती है।

१२ * बरसात के दिनों में रोज दो तीन बार जामुन खाने से भी बहुत लाभ होता है।

१३ * दो सौ मिलीग्राम गाय के दूध में एक चम्‍मच शहद मिलाकर पीने से वीर्य की कमी दूर हो जाती है।


धातु दुर्बलता दूर करने के उपाय


१ * बीस मिलीग्राम ताजे आंवले का रस लें और उसमें शहद मिलाकर पीने से धातु पुष्‍ट होती है।

२ * रोज सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर खाइए और ऊपर से इलायची, चीनी और कौंच डालकर उबाला गया दूध पिएं। इससे धातु दुर्बलता दूर होती है।

३ * इलायची दाना, बादाम, जावित्री का चूर्णं, शक्‍कर व गाय का मक्‍खन एक साथ मिलाकर खाने से धातु पुष्‍ट होती है।

४ * अमलतास की छाल का महीन चूर्णं दो ग्राम की मात्रा में लेकर उसमें ४ ग्राम शक्‍कर मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह शाम लेने से बहुत फाएदा होता है।


धातुस्राव होने पर इन उपायों को अजमाएं


१ * आप तुलसी की जड़ सुखाकर उसका चूर्णं बना लें। फिर यह चूर्णं एक ग्राम मात्रा में, एक ग्राम अश्‍वगंधा के चूर्णं में मिलाकर खाएं और ऊपर से दूध पी जाएं, आपको बहुत लाभ होगा।

२ * बीस ग्राम उड़द की दाल का आटा लेकर उसे गाय के दूध में उबालें। फिर इसमें थोड़ा सा घी मिलाकर कुनकुना ही पी जाएं। इसका रोज सेवन करने से पेशाब की नली से धातु स्राव पूरी तरह बंद हो जाएगा। (उड़द की दाल सेक्‍स पावर बढ़ाने और उसकी समस्‍याओं को दूर करने में बहुत सहायक होती है)

३ * ५० ग्राम इलायची, १५-२० तुलसी के पत्‍ते व दस ग्राम मिश्री का क्‍वाथ बनाकर पीने से बहुत लाभ होता है।

४ * इलायची दाने और सेंकी हुई हींग का लगभग तीन रत्‍ती चूर्णं घी और दूध के साथ पीने से पेशाब में धातु का स्राव बंद हो जाता है।

५ * कड़वे कुंदरू की जड़ का क्‍वाथ बनाकर २०-२५ दिन तक सेवन करने से धातु स्राव बंद हो जाता है, साथ ही मर्दानगी भी बढ़ती है।


नपुसंकता दूर कर मर्दांगनी वापस पाने के उपाय


१ * तिल और गोखरू दूध में उबालकर पीने से बहुत लाभ होता है।

२ * दो सौ ग्राम लहसुन पीसकर उसमें ६०० ग्राम शहद मिलाकर एक साफ जार में भर कर अच्‍छी तरह ढक्‍कन बंद करके गेहूं की बोरी में रख दें। फिर तीस दिन बाद उसे बोरी से बाहर निकालें और 
१० ग्राम की मात्रा में चालीस पचास दिनों तक रोज सेवन करने से नपुसंकता दूर होती है और खोयी हुई मर्दांगनी वापस आ जाती है।

३ * पन्‍द्रह ग्राम तुलसी के बीज और ३० ग्राम सफेद मूसली का पाउडर तैयार करें। फिर इसमें ६० ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और बोतल में भरकर रखें। इस पाउडर को ५ ग्राम रोज सुबह शाम दूध के साथ पिएं।

४ * बेल की १०-१५ पत्तियां, २ बादाम गिरी और डेढ़ सौ ग्राम चीनी। इन तीनों को पीसकर उसमें पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं और एक चौथाई पानी रह जाने पर उतार लें और ठंडा करके पिएं।

५ * २० मिलीग्राम सफेद प्‍याज़ का रस, १० ग्राम शहद और ३ मिलीग्राम अदरक का रस व २ ग्राम घी लेकर सभी चीजों को एक साथ मिलाकर २० - २५ दिनों तक लेने से नपुसंकता दूर होती है।

६ * नारियल के चूरे को बरगद के दूध की ५ – ६ बूंद मिलाएं, फिर इस मिश्रण में ३ टी-स्‍पून शहद मिलाकर सेवन करें। इससे मर्दांनगी बढ़ेगी।

७ * जंगली पालक के १०० ग्राम बीज का पाउडर बना लें। फिर लगभग ढाई ग्राम पाउडर दिन में तीन बार एक कप दूध के साथ लें। लगभग डेढ़ महीने तक सादा खाना खाएं। आपको बहुत आराम मिलेगा।


(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)   

Monday, February 23, 2015

स्‍वाइन फलू से बचाव व इलाज, देश में फैली इस भयानक बीमारी से छुटकारा पाने के कुछ आसान असर कारक उपाय।


स्‍वाइन फलू से बचाव व इलाज


स्‍वाइन फलू ‘ए’ टाइप के इन्‍फलुएंजा वायरस से होती है। इस वायरस को H-1 N-1 के नाम से जाना जाता है। इस वायरस से होने वाला स्‍वाइन फलू, साधारण मौसमी जुकाम, खांसी, बुखार जैसा ही होता है। इसलिए यह पहचानना मुश्किल है, कि रोगी को स्‍वाइन फलू हुआ है अथवा साधारण खांसी, जुकाम और बुखार। पर कहते हैं न, सावधानी ही बचाव है।
इसलिए साधारण खांसी, जुकाम, बुखार व गले में खराश हो, तो उसे अनदेखा न करें। यह स्‍वाइन फलू भी हो सकता है।
स्‍वाइन फलू का वायरस पीडि़त व्‍यक्ति के छींकने, खांसने, हाथ मिलाने, दरवाजों को छूने, की-बोर्ड माउस, व रिमोट इत्‍यादि को इस्‍तेमाल करने से फैल सकता है। इसलिए संक्रमित व्‍यक्ति से दूर रहने और उसके द्धारा प्रयोग की गई चीजों से दूर रहने में ही भलाई है।


स्‍वाइन फलू के लक्षण


१ * नाक लगातार बहना, छींक आना व नाक का जाम हो जाना।

२ * मसल्‍स में दर्द या अकड़न महसूस करना।

३ * सिरदर्द।

४ * गले में खराश होना, गला लाल होना।

५ * बुखार व दवा के इस्‍तेमाल के बावजूद बुखार कम होने के बजाए, बढ़ जाना।

६ * नींद रहना और थकान ज्‍यादा महसूस करना।

स्‍वाइन फलू का वायरस कैसे खत्‍म होता है?


यह वायरस प्‍लास्टिक व स्‍टील में २४ से ४८ घंटे तक जीवित रहता है। कपड़ों और कागज में ८ से १२ घंटे तक जीवित रहता है। टिश्‍यू पेपर में १५ मिनट तक तथा हाथों में ३० मिनट तक जीवित रहता है।
इस वायरस को खत्‍म करने के लिए आप डिटर्जेंट, ब्‍लीच, एल्‍कोहल तथा साबुन का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यदि रोगी में स्‍वाइन फलू के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं, तो वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है।


आयुर्वेद में स्‍वाइन का उपचार मौजूद है।


महत्‍वपूर्णं उपचार

आप थोड़ा कपूर, छोटी इलायची, पुदीने की सूखीं पत्तियां व हल्‍दी का चूर्णं मिलाकर एक पोटली बना लें। इसके बाद दिन भर बार बार इस पोटली को सूंघने से स्‍वाइन फलू जैसी भयानक बीमारी से बचा जा सकता है। (यदि स्‍वाइन फलू हो ही गया है, तो अंग्रेजी इलाज भी कराएं, क्‍योंकि यह जानलेवा बीमारी है।

अन्‍य उपचार


१ * गिलोय सत्‍व २ रत्‍ती पौन ग्लिास पानी के साथ लें।

२ * ५ – ६ तुलसी के पत्‍ते और काली मिर्च के २ – ३ दाने पीसकर चाय में डाल कर दिन तीन चार बार पीएं। आराम मिलेगा साथ ही बचाव भी संभव होगा।

३ * चार पांच तुलसी के पत्‍ते, ५ ग्राम अदरक, एक चुटकी काली मिर्च और इतनी ही हल्‍दी का चूर्णं एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो तीन बार पीएं।

४ * आधा चम्‍मच हल्‍दी एक ग्‍लास दूध में उबालकर पीएं।

५ * आधा चम्‍मच हल्‍दी गरम पानी अथवा शहद में मिलाकर भी ली जा सकती है।

६ * गिलोय, कालमेध, भुईं आंवला, चिरायता, वासा, सरपुंखा इत्‍यादि जड़ी बूटियां भी बहुत लाभदायक हैं।

७ * आधा चम्‍मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो तीन बार पीने से बहुत लाभ होता है।

८ * जरांकुश (आज्ञाघास) व तुलसी के पत्‍ते उबालकर पीने से फाएदा होगा।

९ * दालचीनी का चूर्णं शहद के साथ या दालचीनी की चाय पीना भी लाभदायक होता है।


तो यह तो थे स्‍वाइन फलू के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार। साथ ही मैं फिर से कहना चाहूंगी कि इस संबंध में वैध, हकीम व डाक्‍टर की सलाह जरूर लें। साथ ही अंग्रेजी इलाज कराना बेहतर है। मैंने जो आयुर्वेदिक उपचार बताए हैं, उन्‍हें आप प्राथमिक चिकित्‍सा के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। इस बीमारी का इलाज हौम्‍योपैथी में भी मौजूद है। इसके लिए आप हौम्‍योपैथिक डॉक्‍टर से मिल सकते हैं। साथ बचाव जितना कर सकें जरूर करें।
आप थ्री लेयर सर्जिकल मास्‍क को इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह मास्‍क चार घंटों तक तथा N-95 मास्‍क आठ घंटों तक सुरक्षा करता है। सिर्फ ये दो ही मास्‍क ऐसे हैं, जो स्‍वाइन फलू को वायरस को रोकने में सक्षम हैं। इसलिए सस्‍ते मास्‍क पर भूलकर भी भरोसा न करें। थ्री लेयर मास्‍क बाजार में १० – १२ रूपए तथा N-95 मास्‍क १०० से १५० रूपए में उपलब्‍ध है। ये मंहगें जरूर हैं। पर पैसा जान से बढ़कर नहीं होता। इसलिए इन्‍हें इस्‍तेमाल करने में संकोच न करें।


(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)